Wednesday, 25 April 2007

विकलांग एथलीट पिस्टोरियस का जलवा

इरादे बुलंद हों तो क्या नहीं हो सकता. ऐसे ही चट्टानी हौसले की जिंदा मिसाल हैं पिस्टोरियस. पैरों से लाचार इस शख्स का ट्रैक पर जलवा देखते ही बनता है.

बात ज़्यादा पुरानी नहीं है. तीन साल पहले तक दक्षिण अफ़्रीका के ऑस्कर पिस्टोरियस ने ट्रैक तक नहीं देखा था और वह अकेले यूँ ही शौकिया दौड़ा करते थे.

लेकिन आज वह एथलीटों की दुनिया की सनसनी हैं. 'विकलांग वर्ग' में उनके नाम 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर के विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं.

उनके कोच एमपी लोव कहते हैं, "पिस्टोरियस जन्मजात चैंपियन हैं."

बीस वर्षीय पिस्टोरियस दुनिया के उन गिने-चुने एथलीटों में शामिल हैं जो ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई करने का माद्दा रखते हैं.

पिस्टोरियस इस मुकाम से एक सेकेंड से भी कम समय से पीछे हैं.

लेकिन ओलंपिक के लिए पिस्टोरियस सरीखा दावा शायद ही किसी और का हो. वह एक नहीं बल्कि दोनों पैरों से लाचार हैं.

'ब्लेड रनर'

जन्म से ही उनके घुटने से निचले हिस्से में हड्डियाँ नहीं थी. एक साल की उम्र में ही डॉक्टरों ने उनके पैरों को आपरेशन से अलग कर दिया.

कृत्रिम तरीके से तैयार पैर के सहारे उन्होंने चलना सीखा और उन्हें विश्वास होने लगा कि इससे वह किसी को भी पछाड़ सकते हैं.

कार्बन फ़ाइबर से तैयार यह कृत्रिम पैर पिस्टोरियत को इतना भाया कि ट्रैक पर दौड़ता देख लोग उन्हें 'ब्लेड रनर' कहने लगे.

उनके इन कृत्रिम पैरों ने खेलों में इतिहास तो रचा, लेकिन विवाद भी खड़ा कर दिया.

लोगों का कहना था कि पतले और लंबे 'ब्लेड' पिस्टोरियस को लंबी डग भरने में अतिरिक्त मदद करते हैं.

पिस्टोरियस ने तो इन दावों का खंडन किया ही, ब्लेड के निर्माता ओस्सर ने भी कहा कि पैर जो काम कर सकते हैं, 'ब्लेड' की क्षमता उससे कहीं कम होती है.

रिकॉर्ड

उनके रिकॉर्ड से तो दुनिया के कई देशों के राष्ट्रीय चैंपियन तक शर्मसार हो जाएँ.

चार सौ मीटर दौड़ में पिस्टोरियस का विश्व रिकॉर्ड 46.56 सेकेंड का है और वो 2004 में एथेंस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट (44.0 सेकेंड) से बहुत पीछे नहीं हैं.

यही नहीं 200 मीटर दौड़ पिस्टोरियस ने 21.58 सेकेंड में पूरी की है, जबकि 2004 ओलंपिक में स्वर्ण पदक 19.79 सेकेंड का समय निकालने वाले एथलीट की झोली में गया था.

सौ मीटर फर्राटा में पिस्टोरियस का रिकॉर्ड 10.91 सेकेंड का है और 2004 का ओलंपिक रिकॉर्ड है 9.85 सेकेंड.

मुहिम

पूर्व विश्व रिकॉर्डधारी और एक ज़माने में ब्रिटेन के एथलीट नायक कोलिन जैक्सन का कहना है कि पिस्टोरियस को एक मौक़ा दिया जाना चाहिए.

जैक्सन ने बीबीसी से कहा, "मैं समझता हूँ कि उन्हें पहले पैरालंपियन के रूप में ओलंपिक खेलों में मौक़ा दिया जाए."

उन्होंने कहा, "वह वास्तव में बेहतरीन एथलीट हैं. वह युवा हैं और न केवल 2008 ओलंपिक बल्कि 2012 के ओलंपिक खेलों में भी शिरकत कर सकते हैं."

Tuesday, 24 April 2007

युगांतकारी नेता थे बोरिस येल्तसिन

रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन बहुत ही दिलचस्प व्यक्ति थे. उनका अंदाज़ हमेशा ही नाटकीय रहा. और सत्ता के शीर्ष तक उनका सफ़र भी कम नाटकीय नहीं था.

उनकी राजनीतिक यात्रा एक पारंपरिक साम्यवादी के रूप में शुरू हुई, जबकि आगे चल कर उनकी ख्याति रूस के नए लोकतंत्र के खुले समर्थक के रूप में हुई.

1991 में सैनिक तख़्तापलट के प्रयासों का विरोध करते हुए वे एक टैंक पर जा चढे और सोवियत सैनिकों से तख़्तापलट की कोशिश करने वाले अधिकारियों की बात नहीं मानने की अपील की.

हालाँकि बाद में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया, और शांतिपूर्ण ढंग से सोवियत संघ का विखंडन होने दिया.

कुछ ही महीनों के भीतर उन्होंने तत्कालीन सोवियत नेता मिखाइल गोर्वाच्योफ़ को क्रेमलिन से बाहर कर दिया, और ख़ुद रूस के पहले राष्ट्रपति चुने गए.

सार्वजनिक जीवन में नाटकीयता और लोकलुभावन तौर-तरीकों को आज़माने वाले येल्तिसन ने अपने कार्यकलापों के दूरगामी परिणामों की कभी भी ज़्यादा परवाह नहीं की. जब येल्तसिन सत्ता में आए तो रूसी समाज उथल-पुथल के अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा था.

उनके शासन के शुरुआती कुछ वर्षों की अफ़रातफ़री, संगठित अपराध का बोलबाला और क़ानून का तिरस्कार जैसी बातें शायद लोगों को ठीक तरह याद नहीं रहे. लेकिन उनके किए कुछ काम अब भी मौजूदा रूसी व्यवस्था की बुनियाद हैं.

जैसे, येल्तसिन ने एक सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति के इर्द-गिर्द केंद्रित जिस संविधान को लागू किया, वो आज भी रूसी क़ानून की बुनियाद है.

सैनिक कार्रवाई

हालाँकि येल्तसिन ने अपने कार्यकाल के दौरान जनता को जो राजनीतिक अधिकार प्रदान किए, वो पहले उपलब्ध नहीं थे. मीडिया को अधिकारियों की, यहाँ तक ख़ुद येल्तसिन की आलोचना करने की छूट थी. उस तरह की आज़ादी वहाँ आज के दिन संभव नहीं है.

चेचन्या में सैनिक कार्रवाई के लिए येल्तसिन को शायद इतिहास में उतनी अच्छी जगह नहीं मिले. येल्तसिन ने विद्रोहियों को कुछ दिनों के भीतर परास्त कर देने के दावे के साथ पहला चेचन युद्ध शुरू किया था.

लेकिन युद्ध वर्षों तक चला जिसमें हज़ारों लोगों की मौत हुई. उस युद्ध के कारण पूरा काकेसस क्षेत्र राजनीतिक रूप से अब तक संवेदनशील बना हुआ है.

जब पूर्व सोवियत नेता मिखाइल गोर्वाच्योफ़ को बोरिस येल्तसिन की विरासत का आकलन करने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि येल्तसिन ने देश के लिए बड़े-बड़े काम किए, लेकिन बाद में बड़ी-बड़ी ग़लतियाँ भी की.

बोरिस येल्तसिन भले रूसियों को न तो शांति, और न ही संपन्नता दे सके. लेकिन वे सात दशकों से चले आ रहे सोवियत साम्यवाद को ख़त्म करने में सहायक रहे और भविष्य में शायद उन्हें इसी बात के लिए याद किया जाए.

Sunday, 8 April 2007

सुपरमैन के कपड़ों की नीलामी

सत्तर के दशक की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म सुपरमैन में भूमिका निभाने वाले क्रिस्टोफ़र रीव की पोशाक एक नीलामी में एक लाख़, 15 हजार डॉलर में बिकी.

इस नीलामी का आयोजन फिल्मों के इतिहास पर काम करने वाली एक कंपनी ने किया था.

प्रतीकचिन्हों की इस नीलामी में फ़िल्म और टेलीविज़न के कुछ पोस्टर और पटकथाएँ 20 लाख़ डॉलर में बिकीं.

सुपरमैन की पोशाक उम्मीद के विपरीत लगभग दोगुने मूल्य पर बिकी.

उल्लेखनीय है कि सुपरमैन की भूमिका निभाने वाले क्रिस्टोफ़र रीव का वर्ष 2004 में निधन हो गया था.

नीलामी में 1979 की फिल्म 'एलियन' में दूसरे ग्रह के प्राणी वाली पोशाक और 'बैटमैन' फ़िल्म का ‘बैटसूट’ भी बेचा गया.

1995 में बनी फिल्म 'बैटमैन फॉर एवर' का ‘बैटसूट’ 63 हज़ार 250 डॉलर में और 'एलियन' की पोशाक एक लाख़, 26 हज़ार पाँच सौ डॉलर में बिकी.

1938 में बनी फ़िल्म “द विज़र्ड ऑफ ओज़” की एक दुर्लभ पोशाक एक लाख़,15 हजार डॉलर में बिकी.

Monday, 2 April 2007

भारतीय शेयर बाज़ारों में रिकॉर्ड गिरावट

महँगाई पर लगाम कसने के भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों का शेयर बाज़ार पर विपरीत असर हुआ और मुनाफ़ावसूली के दबाव में शेयर बाज़ारों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स ने 616 अंकों का गोता लगाया.

सेंसेक्स के इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है. इससे पूर्व, 18 मई 2006 को सेंसेक्स 826 अंक लुढ़का था.

उधर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी में भी गिरावट आई और यह लगभग 188 अंक यानी पाँच फ़ीसदी नीचे आकर 3711.95 पर टिका.

सेंसेक्स में सोमवार को बाज़ार खुलने के साथ ही गिरावट का रुख रहा. दोपहर तक यह 400 अंकों से ज़्यादा गिर चुका था और अंतिम कारोबारी सत्र में भी यह संभल नहीं सका.

कारोबार बंद होते समय यह 616 अंकों की गिरावट के साथ 12455.37 पर बंद हुआ.

ब्याज़ दर का असर

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को छोटी अवधि के लिए वाणिज्यिक बैंकों को देय ऋणों पर ब्याज़ दर यानी रेपो रेट चौथाई फ़ीसदी बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया था.

बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इसी फ़ैसले से शेयर बाज़ारों में गिरावट आई है.

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने नक़द आरक्षण अनुपात यानी सीआरआर को भी छह प्रतिशत से बढ़ाकर साढ़े छह प्रतिशत कर दिया था. सीआरआर बैंकों की नगदी का वो हिस्सा होता है जो उन्हें रिजर्व बैंक में जमा रखना पड़ता है.

रिजर्व बैंक के इस फ़ैसले के बाद कई वाणिज्यिक बैंकों ने होम लोन पर ब्याज़ दरें बढ़ाने की घोषणा की है.

बाज़ार में गिरावट का सबसे अधिक असर बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर दिखा और एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों के दाम चार से पाँच फ़ीसदी गिर गए.

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से सिर्फ़ छह के शेयरों में मुनाफ़ा रहा जबकि 24 शेयरों के भाव गिर गए.

बीएसई में कुल 2546 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ जिनमें से 1771 के भाव नीचे आए.