Friday, 30 March 2007

कुंबले ने वनडे से लिया संन्यास

दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज़ों को अपनी लेग स्पिन से मात देने वाले उस्ताद फिरकी गेंदबाज़ अनिल कुंबले ने वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया है.

कुंबले ने शुक्रवार को बंगलौर में आधिकारिक तौर पर वनडे से संन्यास लेने की घोषणा की.

कुंबले की फिरकी अब सिर्फ़ टेस्ट मैचों में ही देखने को मिलेगी.

टेस्ट और वनडे में भारत की ओर से सबसे अधिक विकेट चटकाने वाले कुंबले ने माना कि विश्व कप इतिहास में भारत की इस बार की शुरुआत बेहद खराब रही.

उन्होंने कहा कि वह युवाओं को मौक़ा देना चाहते हैं. कुंबले ने कहा कि देश में पीयूष चावला, मुरली कार्तिक जैसे स्पिनर मौज़ूद हैं और प्रतिभाओं की कमी नहीं है.

कुंबले ने 271 वनडे मैचों में 337 विकेट लिए हैं और उनका औसत रहा 30.9.

17 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे 36 वर्षीय कुंबले ने इस सफ़र में साथ देने के लिए टीम के साथियों और कोच का शुक्रिया अदा किया.

उन्होंने अपने माता-पिता, भाई और अपनी पत्नी को भी हर कद़म पर उनका साथ देने के लिए धन्यवाद दिया.

विश्व कप में निराशाजनक विदाई के बाद मीडिया से छिपने के सवाल पर कुंबले ने कहा, "हम मीडिया या लोगों से नहीं भाग रहे हैं."

उनका कहना था, "मैं अच्छे प्रदर्शन के साथ वनडे को अलविदा कहना चाहता था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया. उम्मीद है कि टेस्ट क्रिकेट को अपने अंदाज़ में अलविदा कहूँगा."

कप्तानी मुश्किल

भारतीय टीम की कप्तानी को मुश्किल बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विश्व कप में नाकामी के लिए राहुल द्रविड़ को बलि का बकरा बनाया गया.

उन्होंने कहा कि श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैच में हार की वजह बल्लेबाज़ी की विफलता रही.

1990 में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले कुंबले ने कहा कि चार साल पहले जब विश्व कप में टीम में होने के बावजूद भी वह एकादश में जगह नहीं बना पा रहे थे तो उनके मन में वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का विचार आया था, लेकिन टीम में बने रहने और गेंद थामे रहने की तमन्ना से वह ऐसा नहीं कर सके.

कुंबले ने वनडे क्रिकेट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हीरो कप के फ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ किया. उन्होंने महज़ 12 रन देकर छह खिलाड़ियों को पवेलियन की राह दिखाई थी.

Sunday, 25 March 2007

भगवान दास मुख्य न्यायाधीश बने

राणा भगवान दास पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं. पाकिस्तान के इतिहास में दूसरी बार किसी ग़ैर मुस्लिम को यह पद मिला है.

पाकिस्तान के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश राणा भगवान दास को शनिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई गई.

इसके बाद अब जस्टिस भगवान दास ही सर्वोच्च न्यायिक परिषद की अगुआई करेंगे जो निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के ख़िलाफ़ मामलों की जाँच कर रही है.

इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पद का दुरुपयोग करने के मामले में निलंबित कर दिया था. फिलहाल उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है.

उनके निलंबन के ख़िलाफ़ पूरे पाकिस्तान में वक़ीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और कई जगहों पर हिंसा भी हुई.

शपथ

जस्टिस भगवान दास को मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जावेद इक़बाल ने कराची में आयोजित सादे समारोह में शपथ दिलाई.

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है. इससे पहले ईसाई समुदाय के एआर कॉर्नेलियस को साठ के दशक में मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.

राणा भगवान दास को यह ज़िम्मेदारी देने पर कुछ इस्लामी संगठनों ने विरोध जताया था. उनका कहना था कि मुख्य न्यायाधीश ही शरिया कोर्ट के प्रमुख होते हैं, इसलिए कोई ग़ैर मुस्लिम यह पद नहीं संभाल सकता.

लेकिन न्यायाधीश जावेद इक़बाल ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक दृष्टि से किसी ग़ैर मुस्लिम के मुख्य न्यायधीश बनने पर कोई पाबंदी नहीं है.

Sunday, 18 March 2007

हॉलीवुड फ़िल्म का ईरान ने किया विरोध

अमरीका और कनाडा में बसे ईरानी समुदाय के लोग हॉलीवुड की फ़िल्म '300' को लेकर नाराज़ हैं.

कहा जा रहा है कि इस फ़िल्म में ईरान की प्राचीन सभ्यता और इसके इतिहास का ग़लत और ग़ैर ज़िम्मेदाराना तरीके से चित्रण किया गया है.

यह फ़िल्म हालाँकि अमरीका बॉक्स ऑफिस पर सफल रही है और पिछले कई फ़िल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

फ़िल्म इसी सप्ताह यूरोप के सिनेमाघरों में भी रीलीज़ होने जा रही है.

फ़िल्म की कहानी फ्रैंक मिलर के उपन्यास पर आधारित है जिसमें 480 ईसा पूर्व हुए थर्मोपिलई के युद्ध का वर्णन है.

कहा गया है कि इस युद्ध में किस तरह स्पार्टा की 300 सैनिकों की एक छोटी सी सेना ने तत्कालीन पर्सिया (आधुनिक ईरान) के आक्रमण का प्रतिरोध किया था.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह स्पार्टा के राजा ने इस तीन सौ सैनिकों की सेना के साथ ईरानी आक्रमणकारी ज़ेरेक्सेज़ और उसकी लाखों सैनिकों की ख़ूँख़ार सेना का मुँहतोड़ जवाब दिया था.

इस फ़िल्म ने दुनिया भर के ईरानियों का गुस्सा भड़का दिया है. ख़ास तौर पर उत्तर-अमेरिका में बसे ईरानियों के बीच इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

यूनेस्को से अपील

वे इसे अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा पर एक हमला मान रहे हैं.

ईरान की सरकार भी अब इस विरोध में शामिल हो गई है.

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को से अपील की है कि वह इस फ़िल्म की निंदा करे क्योंकि यह ईरान की संस्कृति और इसके इतिहास के लिए अपमानजनक है.

यूनेस्को के महानिदेशक को लिखे एक पत्र में ईरानी प्रतिनिधि मोहम्मद रेज़ा देहशेरी ने कहा है कि इस संस्था कि ज़िम्मेदारी है कि वह इस फ़िल्म की भर्त्सना करे.

देहशेरी ने कहा कि यह फ़िल्म पश्चिमी और पूर्वी सभ्यताओं के बीच संघर्ष को जन्म दे सकता है.

ईरानी सरकार के उच्चाधिकारी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं. वे इसे ईरान के ख़िलाफ़ एक व्यापक अभियान के रूप में देख रहे हैं.

ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के सांस्कृतिक सलाहकार ज़वाद शमाक़दारी ने कहा कि यह ईरान के ‘ इतिहास के साथ खिलवाड़ और ईरान की सभ्यता का अपमान ’ है.

उन्होंने इस फ़िल्म को ईरान और इसके लोगों के ख़िलाफ़ एक ‘ मनौवैज्ञानिक युद्ध ’ की संज्ञा दी.

ईरान के एक राष्ट्रीय अख़बार अयंदेह-नो ने सुर्खी लगाई है- ‘ हॉलीवुड ने छेड़ा ईरानियों के ख़िलाफ़ जंग’.

फ़िल्म के निर्मता वार्नर ब्रदर्स का कहना है कि यह फ़िल्म एक काल्पनिक कहानी है जो मौटेतौर पर एक एतिहासिक घटना पर आधारित है.

कंपनी की ओर से ज़ारी एक बयान में कहा गया है कि उनकी यह फ़िल्म एक काल्पनिक कृति है और इसका उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना है. इसका उद्देश्य किसी जाति या संस्कृति को नीचा दिखाना या किसी तरह का राजनीतिक संदेश देना नहीं है.

ब्लॉग अभियान

फ़िल्म का विरोध करने के लिए ईरानी समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर इंटरनेट का भी सहारा ले रहे हैं जहाँ उन्होंने फारसी ब्लॉगों के ज़रिए इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया है.

अवार्ड जीत चुके ईरानी ब्लॉगर और पत्रकार ओमिद मेमेरियन ने कहा कि इस फ़िल्म में जिस तरह से ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है उससे वे काफ़ी चिंतित हैं.

मेमेरियन कहते हैं, “ यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमरीका के कुछ ही पाठ्यक्रमों में विश्व इतिहास की जानकारी दी जाती है और यहाँ के आम लोगों को ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में गुमराह करना बहुत आसान है. ”

कुछ ब्लॉगरों और टिप्पणीकारों ने इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ अभियान छेड़े जाने का इस आधार पर विरोध किया है कि इस फ़िल्म के विरोध से ज़्यादा बड़ी लड़ाईयाँ अभी लड़ी जानी हैं.

ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई की बढ़ रही आशंका इनमें से एक है.

टोरंटो में बसे पेंदार यूसूफ़ी नाम के एक ईरानी ब्लॉगर ने इंटरनेट पर एक अलग तरह का युद्ध छेड़ दिया है जिसे ‘ गूगल बॉम्बिंग ’ कहा जा रहा है.

यानी करीब़ छह सौ ईरानी ब्लॉगरों और वेबसाईटों ने यूसूफ़ी के वेबसाईट के साथ लिंक जोड़कर इस सर्च ईंजन को ही चकमा देने का प्रयास किया है कि यदि गूगल के ज़रिए लोग इस फ़िल्म के बारे में जानना चाहें तो इस फ़िल्म की जगह ईरानी सभ्यता और संस्कृति के बारे में जानकारियाँ पहले आ जाएँ.

Monday, 12 March 2007

'नशेड़ी राजदूत' वापस बुलाए गए

इसराइल ने अल सल्वाडोर में नियुक्त अपने उस राजदूत को वापस बुला लिया है जो शहर की सड़कों पर नशे में धुत्त और बेहद कम कपड़ों में पाए गए थे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि 'हमने अपने राजदूत को तुरंत वापस बुला लिया है.'

राजदूत के रुप में रफ़ाएल की ये पहली नियुक्त थी. उन्हें 2006 में पदोन्नति देकर पहली बार राजदूत बनाया गया था.

अधिकारियों का कहना है," कई राजदूत पहले भी अपनी हरकतों से देश को 'शर्मसार' करते रहे है लेकिन रफ़ाएल ने अति कर दी."

अधिकारी का कहना था ' इसराइल के साठ वर्षो के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ कि कोई राजदूत किसी देश की सड़कों पर नशे में धुत्त अपने न्यूनतम कपड़ों में घूमता मिले और गलत व्यवहार करे.'

हारेत्ज़ वेबसाइट के अनुसार पुलिस ने दो हफ्ते पहले सैन साल्वाडोर में रफ़ाएल को पकड़ा था.

रफ़ाएल उस समय बेहद नशे में थे. उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह में रबर की गेंद थी.

पिछले साल इसराइल में नियुक्तियों पर नज़र रखने वाली वॉचडॉग ने कूटनीतिक सेवाओं में नियुक्तियों की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि इनमें पारदर्शिता नहीं है.

Friday, 9 March 2007

'जापानियों से अधिक भारतीय अरबपति'

भारतीय अरबपतियों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और उसने इस मामले में जापानियों को भी पीछे छोड़ दिया है. प्रतिष्ठित फ़ोर्ब्स पत्रिका की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 36 भारतीय अरबपति हैं, जबकि 24 जापानी अरबपति हैं.

वर्ष 2006 के मुक़ाबले अरबपतियों की संख्या में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब दुनिया में कुल 946 अरबपति है. जबकि पिछले वर्ष इस सूची में 793 लोग थे.

अरबपतियों की संपत्ति में भी 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स लगातार तेरहवें साल सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किए गए हैं.

फ़ोर्ब्स के अनुसार उपभोक्ता और रीयल एस्टेट क्षेत्र में उछाल और शेयर बाज़ार में मज़बूती के चलते अरबपितयों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है.

पिछले दो दशक से एशिया में जापानी अरबपतियों की संख्या सबसे अधिक रही, लेकिन अब भारतीय अरबपतियों ने जापान को पीछे छोड़ दिया है. फ़ोर्ब्स के मुताबिक यदि इनकी संपत्ति पर नज़र डाली जाए तो भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 191 अरब डॉलर है जबकि जापानी अरबपति 64 अरब डॉलर संपत्ति के मालिक हैं.

शीर्ष सौ में भारतीय

स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल, मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी,विप्रो के अध्यक्ष अज़ीम प्रेमजी उन नौ भारतीयों में शामिल हैं जिन्हें फ़ो‌र्ब्स ने दुनिया के 100 सबसे धनी व्यक्तियों की सूची में स्थान दिया है.

इसमें मित्तल स्टील के लक्ष्मी मित्तल विश्व में पांचवें स्थान पर हैं और उनकी निजी संपत्ति 32 अरब डॉलर की है.

रिलायंस उद्योग के चेयरमैन मुकेश अंबानी 20.1 अरब डॉलर और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी 18.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ इस सूची में 14 वें और 18वें पायदान पर हैं.

प्रेमजी इस सूची में 21 वें स्थान पर हैं और उनकी कुल संपत्ति 17.1 अरब डॉलर है.

शीर्ष सौ अरबपतियों में शामिल अन्य भारतीय हैं- रीयल एस्टेट कंपनी डीएलफ के केपी सिंह (10 अरब डॉलर), भारती टेलीकॉम के सुनील मित्तल और उनका परिवार (साढ़े नौ अरब डॉलर), आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला (आठ अरब डॉलर), एस्सार समूह के शशि और रवि रुइया (आठ अरब डॉलर).

सौ अरबपतियों में भारतीय

  • लक्ष्मी मित्तल
  • मुकेश अंबानी
  • अनिल अंबानी
  • अज़ीम प्रेमजी
  • के पी सिंह
  • सुनील मित्तल और परिवार
  • कुमार मंगलम बिड़ला
  • शशि और रवि रुइया

अरबपतियों की संख्या के मामले में भारत एशिया में अग्रणी देश के रूप में उभरा है. चीन और हांगकांग को मिलाकर 41 अरबपति हैं.

बिल गेट्स सबसे अमीर

फ़ोर्ब्स की सूची में इस बार भी सबसे अधिक अमरीकी हैं. माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन बिल गेट्स लगातार तेरहवें साल पहले स्थान पर हैं. उनकी संपत्ति 56 अरब डालर आँकी गई है.

हालांकि उनके और दूसरे पायदान पर मौजूद वारेन बफेट की संपत्ति का अंतर घटा है. शेयर बाज़ार की जानी-मानी हस्ती बफेट 52 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं.

मेक्सिको के उद्योगपति कार्लोस स्लिम साल भर में अपनी संपत्ति में 19 अरब डॉलर का इजाफ़ा करके तीसरे स्थान पर पहुँच गए हैं. उनकी कुल संपत्ति 49 अरब डॉलर है.

फ़ोर्ब्स के एडिटर-इन-चीफ स्टीव फ़ोर्ब्स ने सूची जारी करते हुए कहा, '' अरबपतियों की संख्या में वृद्धि विश्व की अर्थव्यवस्था में जारी तेज़ी दर्शाती है.यह मानव इतिहास का सबसे समृद्ध वर्ष है.''

फ़ोर्ब्स की एसोसिएट एडिटर ल्यूसा क्रोल ने कहा, ''एशिया के लिए यह अच्छा साल रहा और भारत और चीन के अरबपतियों की संख्या में ख़ासी वृद्धि देखने को मिली.''