अमरीका की कार बनाने वाली कंपनी फ़ोर्ड को पिछले वर्ष 12.7 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है. कंपनी के 103 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ा नुक़सान है.
इतने बड़े नुक़सान की भरपाई करने के लिए कंपनी ने उत्तरी अमरीका में अपनी 16 फ़ैक्टरियों को बंद करने और 45 हज़ार नौकरियों में कटौती करने की योजना बनाई है.
पिछले साल के आख़िरी तीन महीनों में तो कंपनी को 5.8 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ. कारण था बिक्री में भारी गिरावट और कंपनी के ढाँचे में परिवर्तन का भारी ख़र्च.
अमरीका की इस कंपनी को जापान की कई कार निर्माता कंपनियों ख़ासकर टोयोटा से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
आकलन
आकलन ये है कि इस साल जापानी कंपनी टोयोटा अमरीकी बाज़ार में फ़ोर्ड को पीछे छोड़ देगी. फ़ोर्ड अमरीका की दूसरी बड़ी और दुनिया की तीसरी बड़ी कार बनाने वाली कंपनी है.
वर्ष 2006 से पहले फ़ोर्ड को सबसे बड़ा नुक़सान वर्ष 1992 में हुआ था, जब कंपनी को 7.39 अरब डॉलर की वार्षिक चपत लगी थी.
लेकिन अब रिकॉर्ड घाटे के बावजूद फ़ोर्ड का कहना है कि वह वर्ष 2009 तक लाभ में आ जाएगी. फ़ोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेन मुलाली ने कहा, "हम अपनी व्यापारिक ज़रूरतों को समझते हैं और इससे निपटने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने बताया कि कंपनी एक योजना के तहत काम कर रही है और जल्द ही इसका लाभ दिखेगा. एलेन मुलाली के मुताबिक़ कंपनी ने पिछले साल ही योजना पर काम करना शुरू किया है.
पिछले साल फ़ायदे के लिए फ़ोर्ड ने ट्रक, छोटे वाहन और स्पोर्ट्स गाड़ियों में ज़्यादा पैसा लगाया था लेकिन तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण उसे इसका लाभ नहीं मिल सका.
Thursday, 25 January 2007
Friday, 5 January 2007
महिलाओं में 'शराब से डिप्रेशन अधिक'
अमरीका और कनाडा के शोधकर्ताओं ने पाया है कि ज़्यादा शराब पीने का असर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर अधिक होता है और उनमें डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है.
शराब के सेवन और डिप्रेशन के इतिहास के बीच संबंध समझने के लिए इन शोधकर्ताओं ने 6009 पुरुषों और 8054 महिलाओं का अध्ययन किया.
उन्होने पाया कि जो महिलाएँ शराब का ज़्यादा सेवन करती हैं वे पुरुषों के मुकाबले क्लिनिकल डिप्रेशन का जल्दी शिकार होती हैं.
लेकिन 'अल्कोहलिज़्म: क्लिनिकल ऐंड ऐक्सपेरिमेंटल रिसर्च जर्नल' में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार सीमित मात्रा में शराब के सेवन से दोनों में डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ने की कोई संभावना नहीं नज़र आई.
इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि पिछले एक हफ़्ते और एक वर्ष के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने कितनी मात्रा में शराब का सेवन किया. साथ ही उनके शराब पीने के तरीकों को भी देखा गया.
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि आमतौर पर कितनी शराब पी गई और अधिकतम कितनी शराब पी गई.
कनाडा के सेंटर फॉर एडिक्शन ऐंड मैंटल हैल्थ की ओर से किए गए इस शोध में पाया गया कि पुरुषों और महिलाओं में यह अंतर केवल डिप्रेशन के शिकार लोगों में ही सामने आया.
नॉर्थ डेकोटा स्कूल ऑफ मेडिसिन ऐंड हैल्थ सांइसेज़ विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर शैरन विल्सन का कहना है कि डिप्रेशन की शिकार महिलाएँ अपने डिप्रेशन को दबाने के लिए और अधिक शराब पीने के लिए प्रोत्साहित होती हैं.
लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानने के लिए और काम करने की ज़रुरत है कि शराब पीने से डिप्रेशन बढ़ता है या डिप्रेशन होने से शराब का सेवन बढ़ जाता है. या फिर इन दोनों का संबंध किसी और कारण से है.
शराब के सेवन और डिप्रेशन के इतिहास के बीच संबंध समझने के लिए इन शोधकर्ताओं ने 6009 पुरुषों और 8054 महिलाओं का अध्ययन किया.
उन्होने पाया कि जो महिलाएँ शराब का ज़्यादा सेवन करती हैं वे पुरुषों के मुकाबले क्लिनिकल डिप्रेशन का जल्दी शिकार होती हैं.
लेकिन 'अल्कोहलिज़्म: क्लिनिकल ऐंड ऐक्सपेरिमेंटल रिसर्च जर्नल' में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार सीमित मात्रा में शराब के सेवन से दोनों में डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ने की कोई संभावना नहीं नज़र आई.
इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि पिछले एक हफ़्ते और एक वर्ष के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने कितनी मात्रा में शराब का सेवन किया. साथ ही उनके शराब पीने के तरीकों को भी देखा गया.
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि आमतौर पर कितनी शराब पी गई और अधिकतम कितनी शराब पी गई.
कनाडा के सेंटर फॉर एडिक्शन ऐंड मैंटल हैल्थ की ओर से किए गए इस शोध में पाया गया कि पुरुषों और महिलाओं में यह अंतर केवल डिप्रेशन के शिकार लोगों में ही सामने आया.
नॉर्थ डेकोटा स्कूल ऑफ मेडिसिन ऐंड हैल्थ सांइसेज़ विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर शैरन विल्सन का कहना है कि डिप्रेशन की शिकार महिलाएँ अपने डिप्रेशन को दबाने के लिए और अधिक शराब पीने के लिए प्रोत्साहित होती हैं.
लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानने के लिए और काम करने की ज़रुरत है कि शराब पीने से डिप्रेशन बढ़ता है या डिप्रेशन होने से शराब का सेवन बढ़ जाता है. या फिर इन दोनों का संबंध किसी और कारण से है.
अमरीकी कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष
कैलिफ़ोर्निया से निर्वाचित नैन्सी पेलोसी को अमरीकी कांग्रेस का प्रमुख चुना गया है. अमरीकी इतिहास में इस पद पर आने वाली वो पहली महिला हैं.
नैन्सी को हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स के स्पीकर का पद सौंपे जाने के साथ ही अमरीका की डेमोक्रेट पार्टी ने कांग्रेस की बागडोर संभाल ली है.
नैन्सी डेमोक्रेट पार्टी की नेता हैं और अमरीका के राष्ट्रपति पद के विकल्प के तौर पर वो दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं. उनसे पहले राष्ट्रपति पद के लिए उप-राष्ट्रपति की दावेदारी बनती है.
अपने नए दायित्व को संभालते हुए उन्होंने कहा कि वो अपने कार्यकाल के दौरान पारदर्शिता को बढ़ाने पर बल देंगी और साथ ही नैतिक नियमों का कड़ाई से पालन करवाएँगी.
अपने वक्तव्य में इराक़ मुद्दे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही संपन्न हुए चुनावों में अमरीकी लोगों ने इराक़ पर अमरीका की नीति में बदलाव के लिए मतदान किया था.
उन्होंने राष्ट्रपति बुश से अपील की कि वो इराक़ में स्थिरता क़ायम करने को बढ़ावा दें और वहाँ से अमरीकी सेना को फिर से वापस बुलाने के विकल्प पर विचार करें.
नई ज़िम्मेदारी
उन्होंने कहा कि किसी महिला का अमरीकी कांग्रेस का अध्यक्ष चुना जाना अमरीका की महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है.
नैन्सी ने कहा, "हम एक इतिहास रचने में सफल रहे हैं और अब हमें अमरीकी लोगों के हित के लिए आगे बढ़ना है."
पिछले वर्ष के आखिर में ही अमरीका में मध्यावधि चुनाव हुए थे जिसके बाद से देश की 110 वीं कांग्रेस की गठन के बाद से यह पहली बैठक थी.
इन चुनावों में वर्तमान राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था और विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट को लाभ हुआ था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा जनादेश वर्तमान राष्ट्रपति की इराक़ नीति के विरोध में आया है.
नैन्सी को हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स के स्पीकर का पद सौंपे जाने के साथ ही अमरीका की डेमोक्रेट पार्टी ने कांग्रेस की बागडोर संभाल ली है.
नैन्सी डेमोक्रेट पार्टी की नेता हैं और अमरीका के राष्ट्रपति पद के विकल्प के तौर पर वो दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं. उनसे पहले राष्ट्रपति पद के लिए उप-राष्ट्रपति की दावेदारी बनती है.
अपने नए दायित्व को संभालते हुए उन्होंने कहा कि वो अपने कार्यकाल के दौरान पारदर्शिता को बढ़ाने पर बल देंगी और साथ ही नैतिक नियमों का कड़ाई से पालन करवाएँगी.
अपने वक्तव्य में इराक़ मुद्दे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही संपन्न हुए चुनावों में अमरीकी लोगों ने इराक़ पर अमरीका की नीति में बदलाव के लिए मतदान किया था.
उन्होंने राष्ट्रपति बुश से अपील की कि वो इराक़ में स्थिरता क़ायम करने को बढ़ावा दें और वहाँ से अमरीकी सेना को फिर से वापस बुलाने के विकल्प पर विचार करें.
नई ज़िम्मेदारी
उन्होंने कहा कि किसी महिला का अमरीकी कांग्रेस का अध्यक्ष चुना जाना अमरीका की महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है.
नैन्सी ने कहा, "हम एक इतिहास रचने में सफल रहे हैं और अब हमें अमरीकी लोगों के हित के लिए आगे बढ़ना है."
पिछले वर्ष के आखिर में ही अमरीका में मध्यावधि चुनाव हुए थे जिसके बाद से देश की 110 वीं कांग्रेस की गठन के बाद से यह पहली बैठक थी.
इन चुनावों में वर्तमान राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था और विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट को लाभ हुआ था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा जनादेश वर्तमान राष्ट्रपति की इराक़ नीति के विरोध में आया है.
Thursday, 4 January 2007
14 साल के माइकल ने इतिहास रचा
माइकल ने हर्टफ़ोर्डशर से 3500 मील की यात्रा पर निकले थे और बुधवार को नेल्सन्स के डॉकयार्ड पर पहुँचे.
इससे पहले का रिकॉर्ड सेव क्लोवर के नाम दर्ज था जिन्होंने वर्ष 2005 में अटालांटिक को पार किया था लेकिन उस समय उनकी उम्र 15 साल की थी.
उपप्रधानमंत्री जॉन प्रेस्कॉट ने माइकल को सफल नाविक बताया है.
माइकल छह हफ़्ते समुद्र में गुज़ारकर वापस लौटे हैं.
वापस लौटने पर जैसा उनका स्वागत हुआ उसके लिए उन्होंने कहा कि वे अभिभूत हुए.
माइकल की नौका 'चिकी मंकी' के आसपास उनके पिता की नौका घूमती रही और रेडियो संपर्क बनाए रखा.
जैसा कि माइकल की माँ कहती हैं कि वह चुनौतियाँ पसंद करता है.
चांलवर्स सेकेंड्री स्कूल के हेडटीचर स्टुअर्ट फ़िलिप ने कहा है कि माइकल को छह साल की उम्र से ही नौका चलाने का बड़ा शौक था.
इससे पहले का रिकॉर्ड सेव क्लोवर के नाम दर्ज था जिन्होंने वर्ष 2005 में अटालांटिक को पार किया था लेकिन उस समय उनकी उम्र 15 साल की थी.
उपप्रधानमंत्री जॉन प्रेस्कॉट ने माइकल को सफल नाविक बताया है.
माइकल छह हफ़्ते समुद्र में गुज़ारकर वापस लौटे हैं.
वापस लौटने पर जैसा उनका स्वागत हुआ उसके लिए उन्होंने कहा कि वे अभिभूत हुए.
माइकल की नौका 'चिकी मंकी' के आसपास उनके पिता की नौका घूमती रही और रेडियो संपर्क बनाए रखा.
जैसा कि माइकल की माँ कहती हैं कि वह चुनौतियाँ पसंद करता है.
चांलवर्स सेकेंड्री स्कूल के हेडटीचर स्टुअर्ट फ़िलिप ने कहा है कि माइकल को छह साल की उम्र से ही नौका चलाने का बड़ा शौक था.
Wednesday, 3 January 2007
ओलंपिक की मशाल एवरेस्ट पर
यह ओलंपिक के इतिहास में पहला मौक़ा है जब मशाल को दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर ले जाया जाएगा.
दरअसल, ओलंपिक मशाल दो बार माउंट एवरेस्ट पहुँचेगी, पहली बार वर्ष 2007 में जब मशाल को चोटी पर ले जाने का पूर्वाभ्यास होगा और 2008 में बीजिंग ओलंपिक से पहले.
माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई इतनी अधिक है कि वहाँ ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और आम मशाल का जलना वहाँ संभव नहीं होगा.
बीजिंग ओलंपिक की आयोजन समिति के अधिकारी लिउ जिंगमिन ने बताया, "माउंट एवरेस्ट पर मशाल जलती रहे इसके लिए उसका विशेष डिज़ाइन तैयार किया गया है."
ओलंपिक मशाल को माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी सिरे से नेपाल की ओर से ऊपर ले जाया जाएगा और तिब्बत की ओर से उसे नीचे उतारा जाएगा.
मशाल को एवरेस्ट पर ले जाए जाने की तारीख़ अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को तय करनी है.
चीन ने 1950 में तिब्बत पर क़ब्ज़ा कर लिया था और तिब्बतियों के शीर्ष धर्मगुरू दलाई लामा पिछले पाँच दशकों से भारत में रह रहे हैं.
तिब्बत की स्वतंत्रता की माँग करने वाले लोगों ने पिछले ओलंपिक खेलों के दौरान चीन विरोधी प्रदर्शन किए थे.
माना जा रहा है कि इस बार भी तिब्बत में ओलंपिक मशाल के पहुँचने पर वहाँ विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.
दरअसल, ओलंपिक मशाल दो बार माउंट एवरेस्ट पहुँचेगी, पहली बार वर्ष 2007 में जब मशाल को चोटी पर ले जाने का पूर्वाभ्यास होगा और 2008 में बीजिंग ओलंपिक से पहले.
माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई इतनी अधिक है कि वहाँ ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और आम मशाल का जलना वहाँ संभव नहीं होगा.
बीजिंग ओलंपिक की आयोजन समिति के अधिकारी लिउ जिंगमिन ने बताया, "माउंट एवरेस्ट पर मशाल जलती रहे इसके लिए उसका विशेष डिज़ाइन तैयार किया गया है."
ओलंपिक मशाल को माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी सिरे से नेपाल की ओर से ऊपर ले जाया जाएगा और तिब्बत की ओर से उसे नीचे उतारा जाएगा.
मशाल को एवरेस्ट पर ले जाए जाने की तारीख़ अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को तय करनी है.
चीन ने 1950 में तिब्बत पर क़ब्ज़ा कर लिया था और तिब्बतियों के शीर्ष धर्मगुरू दलाई लामा पिछले पाँच दशकों से भारत में रह रहे हैं.
तिब्बत की स्वतंत्रता की माँग करने वाले लोगों ने पिछले ओलंपिक खेलों के दौरान चीन विरोधी प्रदर्शन किए थे.
माना जा रहा है कि इस बार भी तिब्बत में ओलंपिक मशाल के पहुँचने पर वहाँ विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.
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