Thursday, 28 June 2007

विशालकाय पेंग्विन का जीवाश्म मिला

वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने पेरू में विशालकाय पेंग्विन का जीवाश्म खोजा है. वैज्ञानिकों का दावा है कि ये जीवाश्म साढ़े तीन करोड़ वर्ष से भी अधिक पुराना है.

ये पेंग्विन अधिकतर दक्षिणी महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाते थे.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज से पता चलता है कि इस प्रजाति के पेंग्विनों ने तीन करोड़ वर्ष पूर्व गर्म स्थानों का रुख करना शुरू कर दिया था.

वैज्ञानिकों का कहना है कि पेरू के दक्षिणी तट पर खोजा गया यह जीवाश्म तीन करोड़ 60 लाख वर्ष पुराना है और पेंग्विन की इकडिपटिस सलासी नामक प्रजाति का है.

विशेष प्रजाति

पेंग्विन की यह प्रजाति इन दिनों पाई जाने वाली पेंग्विन से काफी बड़ी थी और इनकी ऊँचाई लगभग डेढ़ मीटर थी.

यानी पृथ्वी पर वर्तमान में मौजूद पेंग्विन प्रजाति को इनके मुक़ाबले बौना कहा जा सकता है.

यही नहीं इकडिपटिस पेंग्विन का सिर लंबा था और इसकी चोंच भाले जैसी नुकीली थी.

ऐसा नहीं है कि इकडिपटिस ही पेंग्विनों की ऐसी प्रजाति थी जो गर्म स्थानों पर रहना पसंद करती थी, अफ़्रीकी या गालापैगो पेंग्विन भी दक्षिणी महासागर के गर्म पानी में रहना पसंद करते थे.

शोध टीम की सदस्य और अमरीका के उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय की डॉ जूलिया क्लार्क का कहती हैं, "ऐसा माना जाता था कि पृथ्वी के इतिहास में तापमान में गिरने के दो महत्वपूर्ण समयकालों के बाद पेंग्विन ठंडे स्थानों तक पहुँचे, लेकिन हमने अपनी खोज में उन्हें गर्म स्थानों पर पाया है और वो भी बहुत-बहुत पहले."

Wednesday, 27 June 2007

एक युग का समापन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने क़रीब एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद आज अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन नए प्रधानमंत्री बनेंगे.

टोनी ब्लेयर प्रधानमंत्री के रूप में बुधवार को अपना आख़िरी दिन बिताया और संसद में आख़िरी बार इस हैसियत से सांसदों के सवालों के जवाब दिए.

ब्रितानी प्रधानमंत्री के सरकारी कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट में स्टाफ़ को विदा कहने के बाद टोनी ब्लेयर शाही महल बकिंघम पैलेस गए और महारानी एलिज़ाबेथ को अपना इस्ताफ़ी सौंप दिया.

उसके बाद महारानी एलिज़ाबेथ संसद में बहुमत वाली लेबर पार्टी के नए नेता और मौजूदा वित्त मंत्री गोर्डन ब्राउन को नई सरकार बनाने का न्यौता देंगी.

संभावना जताई जा रही है कि टोनी ब्लेयर प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद मध्य पूर्व के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेष दूत बनाए जाएंगे.

अमरीका ने ब्लेयर को अंतरराष्ट्रीय मध्य पूर्व दूत बनाए जाने के लिए ख़ासी मुहिम चलाई.

एक ब्रितानी अख़बार द सन में छपी ख़बरे के अनुसार राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ब्लेयर को बहुत प्रतिभावान नेता बताया और कहा कि उनके संबंध बराबरी के रहे हैं.

टोनी ब्लेयर 1994 में लेबर पार्टी के अध्यक्ष बने थे और 1997 में भारी जीत के साथ ब्रिटेन के 200 वर्षों के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बने.

वह पिछले 24 वर्षों से सांसद रहे हैं.

इस बीच गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि शिक्षा और किफ़ायती दरों पर घरों की उपलब्धि उनके लिए अहम मुद्दे हैं लेकिन स्वास्थ्य सेवा उनकी प्राथमिकता होगी.

उन्होंने ये भी माना कि इराक़ देश और लेबर पार्टी के लिए ऐसा मुद्दा है जिस पर मत बटा हुआ है. गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि जो सबक ज़रूरी हैं वो ज़रूर सीखा जाएगा.

इराक़ युद्ध में मारे गए ब्रितानी सैनिकों के माता-पिता बुधवार को 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर प्रदर्शन करेंगे.

'ब्लेयर पिछलग्गू नहीं'

उधर मध्य पूर्व के मामलों में मध्यस्थता करने वाला समूह ब्रितानी प्रधानमंत्री का पद छोड़ने जा रहे टोनी ब्लेयर को मध्य पूर्व में विशेष दूत बनाने पर चर्चा कर रहा है.

अमरीका में बुश प्रशासन पहले ही ज़ाहिर कर चुका है कि वह टोनी ब्लेयर के लिए एक बड़ी भूमिका देख रहा है. हालांकि रूस का रुख़ इस मामले में थोड़ा ठंडा रहा है.

टोनी ब्लेयर के पद छोड़ने के मौके पर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ब्रितानी अख़बार सन में उनकी काफ़ी प्रशंसा की है.

उन्होंने लिखा है, "टोनी ब्लेयर बहुत हुनरमंद हैं. हमारी साझेदारी ऐसे दो लोगों के बीच की साझेदारी रही है जो समान स्तर के हैं."

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि टोनी ब्लेयर उनके पिछलग्गू हैं.

Saturday, 23 June 2007

सकुशल धरती पर लौटीं सुनीता

अमरीकी अंतरिक्ष यान अटलांटिस कुछ गंभीर समस्याओं का सामना करने के बाद ज़मीन पर लौट आया है.

अटलांटिस दो सप्ताह के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर गया था जिसके बाद वह शुक्रवार को कैलीफ़ोर्निया में धरती पर उतरा.

अटलांटिस यान ने कैलीफ़ोर्निया के एडवर्ड वायु सैनिक अड्डे पर स्थानीय समय के अनुसार 1549 (जीएमटी-1949) पर धरती को छुआ.

ख़राब मौसम की वजह से इसके ज़मीन पर उतरने का कार्यक्रम कुछ टाला गया और बाद में इसके उतरने का स्थान ही बदलना पड़ा.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अटलांटिस को फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में उतरना था लेकिन फिर कैलीफ़ोर्निया में उतारा गया.

इस शटल में भारतीय मूल की वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स भी वापस लौटी हैं जिन्होंने सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में ठहरने वाली महिला होने का रिकॉर्ड बनाया है.

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में 195 दिन बिताए हैं और उन्होंने अंतरिक्ष में चहलक़दमी करने वाली पहली महिला होने का भी रिकॉर्ड बनाया है.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए इस मिशन में कई चुनौतियां आई और पिछले क़रीब दो सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अंतरिक्ष यात्री कंप्यूटर और यान से जुड़ी कई तकनीकी खराबियां ठीक करते रहे.

नासा के हाल के इतिहास में इस मिशन को सबसे कठिन बताया जा रहा था. अंतरिक्ष यात्रियों को मात्र 11 दिन रुकना था लेकिन तकनीकी ख़राबियों की वजह से उन्हें क़रीब एक पखवाड़ा रुकना पड़ा.

हालात यहां तक आ गए थे कि अंतरिक्ष स्टेशन के कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया था और लग रहा था कि पुराने पड़ चुके अंतरिक्ष स्टेशन को पूरी तरह छोड़ने की नौबत आने वाली है क्योंकि इन कंप्यूटरों का मुख्य कार्य अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन से जुडा़ होता है.

इस खराबी को ठीक कर लिया गया लेकिन फिर अंतरिक्ष यान अटलांटिस में समस्याएं पैदा हो गईं. अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने के दौरान यान का थर्मल फोम घिस गया था.इस हिस्से को ठीक करने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में चलना पड़ा जिसमें बहुत समय लगा.

नासा के अधिकारियों ने बाद में कहा कि मिशन के सारे उद्देश्य पूरे हो गए इसलिए अटलांटिस को ज़मीन पर वापस लौटने की अनुमति दे दी गई.

Saturday, 16 June 2007

सुनीता ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास

भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में लगातार सबसे लंबे समय तक ठहरने वाली पहली महिला बन गई हैं.

सुनीता छह महीने से भी अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर हैं.

अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि सुनीता विलियम्स ने शनिवार को ग्रीनिच मान समय के अनुसार 5 बजकर 47 मिनट पर 996 में शैनौन ल्युसिड के बनाए 188 दिन और 4 घंटे के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया.

गत वर्ष 10 दिसंबर को अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू करने वाली सुनीता गुरुवार को धरती पर लौटने वाली हैं.

वैसे सुनीता का यह कोई पहला रिकॉर्ड नहीं है. इस साल की शुरुआत में ही उन्होंने अंतरिक्ष में 22 घंटे 27 मिनट तक चहलक़दमी कर किसी महिला द्वारा अब तक के सबसे लंबे स्पेस वॉक का रेकॉर्ड बनाया था.

इससे पहले यह रिकॉर्ड अंतरिक्ष यात्री कैथरीन थार्नटन के नाम था. उन्होंने 21 घंटे से अधिक समय तक के स्पेस वॉक का रिकॉर्ड बनाया था.

वापसी

सुनीता अंतरिक्ष में मैराथन करने वाली दुनिया की पहली अंतरिक्ष यात्री भी हैं. उन्होंने इस वर्ष अप्रैल में बोस्टन मैराथन में अंतरिक्ष से ही शिरकत की थी.

ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष 10 दिसंबर को अंतरिक्ष यान डिस्कवरी से सुनीता और छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी.

सुनीता को अंतरिक्ष स्टेशन से वापस लाने के लिए अंतरिक्ष यान अटलांटिस ने पिछले सप्ताह कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी लेकिन इसी दौरान उसके बाहरी सुरक्षा कवच में दरार आ गई थी.

इसके बाद आईएसएस के कंप्यूटरों में ख़राबी आ गई थी लेकिन नासा का कहना है कि इसे भी ठीक कर दिया गया है.

नासा का कहना है कि इन ख़राबियों को दुरुस्त करने के साथ ही अटलांटिस और सुनीता की सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ़ हो गया है.

सलमान रुश्दी को 'नाइटहुड'

भारतीय मूल के चर्चित और विवादित अंग्रेज़ी लेखक सलमान रुश्दी को ब्रिटेन की महारानी ने 'नाइटहुड' के ख़िताब से सम्मानित किया है.

इस ख़िताब के बाद सलमान रुश्दी को सर सलमान रुश्दी के नाम से जाना जाएगा.

उनकी किताब 'सैनेटिक वर्सेस' से दुनिया भर के मुसलमान नाराज़ हो गए थे और 1989 में ईरान के आध्यात्मिक नेता आयतुल्ला ख़ुमैनी ने उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था.

इसके बाद 1999 तक वे सार्वजनिक जीवन से दूर रहे. दस साल बाद उनका अज्ञातवास हालांकि ख़त्म हो गया लेकिन उनसे जुड़े विवाद कभी ख़त्म नहीं हुए.

कट्टर धर्मनिरपेक्ष सलमान रुश्दी ने ब्रितानी सांसद जैक स्ट्रॉ का उस समय समर्थन किया था जब उन्होंने कहा मुसलमान महिलाओं के बुर्क़ा पहनने पर टिप्पणी की थी.

सलमान रुश्दी ने तब इस्लाम के 'संपूर्णतावाद' के ख़िलाफ़ चेतावनी भी दी थी.

बुकर अवार्ड

मुंबई के एक सफल व्यावसायी के बेटे सलमान रुश्दी का जन्म 1947 को मुंबई में एक मुस्लिम परिवार में हुआ.

उनकी शिक्षा इंग्लैंड के रग्बी स्कूल में हुई और फिर उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की.

विज्ञापन की दुनिया से अपना करियर शुरु करने वाले रुश्दी बाद में पूर्णकालिक लेखक हो गए.

उनका पहला उपन्यास 'ग्रिमस' 1975 में आया था लेकिन साहित्यिक दुनिया और पाठकों ने इसका कोई नोटिस नहीं लिया.

लेकिन उनके दूसरे उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' ने उन्हें साहित्य जगत में ख्याति दिलवाई और 1981 में उन्हें बुकर सम्मान दिया गया.

1993 में उन्हें विशेष सम्मान 'बुकर ऑफ़ बुकर्स' दिया गया क्योंकि उनके उपन्यास को 25 बरसों में बुकर सम्मान से सम्मानित किताबों में सबसे अच्छा माना गया.

19 जून को 60 साल के होने जा रहे सलमान रुश्दी को उनके उन्मुक्त बयानों के लिए जाना जाता है.

लेखन

सलमान रुश्दी इतिहास को अपने लेखन का विषय बनाते हैं और फिर अपनी अद्भुत कल्पनाशीलता के साथ इसके इर्दगिर्द कहानी बुनते हैं.

उनकी कहानियाँ भारत और पाकिस्तान की ज़मीन पर बुनी जाती हैं.

उनकी चौथी किताब 'सैनेटिक वर्सेस' में कल्पनाशीलता, दर्शन और विडंबनाओं के साथ ख़ुदा और शैतान के बीच लड़ाई को चित्रित किया गया है.

इस किताब की इस्लामिक समाज में तीखी प्रक्रिया हुई और इसे ईशनिंदा क़रार दिया गया. आरोप है कि रुश्दी ने पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया.

'सैनेटिक वर्सेस' को कई मुस्लिम देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया और ईरान के धार्मिक-आध्यात्मिक नेता ख़ुमैनी ने रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया.

दस साल के अज्ञातवास में सलमान रुश्दी पुलिस की सुरक्षा में रहे लेकिन उनका लिखना जारी रहा और उन्होंने कई उपन्यास और निबंध लिखे.

नाइटहुड दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सलमान रुश्दी ने कहा, "यह एक बड़ा सम्मान है और मै आभारी हूँ कि मेरे लेखन को इस तरह पहचान दी गई."