यह ओलंपिक के इतिहास में पहला मौक़ा है जब मशाल को दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर ले जाया जाएगा.
दरअसल, ओलंपिक मशाल दो बार माउंट एवरेस्ट पहुँचेगी, पहली बार वर्ष 2007 में जब मशाल को चोटी पर ले जाने का पूर्वाभ्यास होगा और 2008 में बीजिंग ओलंपिक से पहले.
माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई इतनी अधिक है कि वहाँ ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और आम मशाल का जलना वहाँ संभव नहीं होगा.
बीजिंग ओलंपिक की आयोजन समिति के अधिकारी लिउ जिंगमिन ने बताया, "माउंट एवरेस्ट पर मशाल जलती रहे इसके लिए उसका विशेष डिज़ाइन तैयार किया गया है."
ओलंपिक मशाल को माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी सिरे से नेपाल की ओर से ऊपर ले जाया जाएगा और तिब्बत की ओर से उसे नीचे उतारा जाएगा.
मशाल को एवरेस्ट पर ले जाए जाने की तारीख़ अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को तय करनी है.
चीन ने 1950 में तिब्बत पर क़ब्ज़ा कर लिया था और तिब्बतियों के शीर्ष धर्मगुरू दलाई लामा पिछले पाँच दशकों से भारत में रह रहे हैं.
तिब्बत की स्वतंत्रता की माँग करने वाले लोगों ने पिछले ओलंपिक खेलों के दौरान चीन विरोधी प्रदर्शन किए थे.
माना जा रहा है कि इस बार भी तिब्बत में ओलंपिक मशाल के पहुँचने पर वहाँ विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.
Wednesday, 3 January 2007
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