पाकिस्तान के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश राणा भगवान दास को शनिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई गई.
इसके बाद अब जस्टिस भगवान दास ही सर्वोच्च न्यायिक परिषद की अगुआई करेंगे जो निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के ख़िलाफ़ मामलों की जाँच कर रही है.
इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पद का दुरुपयोग करने के मामले में निलंबित कर दिया था. फिलहाल उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है.
उनके निलंबन के ख़िलाफ़ पूरे पाकिस्तान में वक़ीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और कई जगहों पर हिंसा भी हुई.
शपथ
जस्टिस भगवान दास को मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जावेद इक़बाल ने कराची में आयोजित सादे समारोह में शपथ दिलाई.
पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है. इससे पहले ईसाई समुदाय के एआर कॉर्नेलियस को साठ के दशक में मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.
राणा भगवान दास को यह ज़िम्मेदारी देने पर कुछ इस्लामी संगठनों ने विरोध जताया था. उनका कहना था कि मुख्य न्यायाधीश ही शरिया कोर्ट के प्रमुख होते हैं, इसलिए कोई ग़ैर मुस्लिम यह पद नहीं संभाल सकता.
लेकिन न्यायाधीश जावेद इक़बाल ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक दृष्टि से किसी ग़ैर मुस्लिम के मुख्य न्यायधीश बनने पर कोई पाबंदी नहीं है.
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